नमस्कार दोस्तो,
आज हम जानेंगे कि आपराधिक षडयंत्र क्या होता है और भारतीय दण्ड संहिता 1860 में ऐसा करने पर क्या सजा का प्रावधान दिया गया है।
दोस्तो हम सभी को आपराधिक षडयंत्र के बारे में विस्तृत जानकारी भारतीय दण्ड संहिता की धारा 120क में दी गयी है जिसके अनुसार-
धारा 120 (क):- आपराधिक षडयंत्र की परिभाषा:-
जब भी कोई दो या दो से अधिक व्यक्ति द्वारा निम्न में से कोई कृत्य किया जाता है तो यह समझा जाएगा कि उन सभी के द्वारा आपराधिक षडयंत्र किया गया है।
1. कोई अवैध कार्य,
2. कोई ऐसा कार्य जो अवैध नही है किंतु अवैध तरीके से या आवेध साधनों से करने या करवाने को सहमत होते है, तब ऐसी सहमति आपराधिक षड्यंत्र कहलाती है।
दोस्तो ये तो थी परिभाषा मगर कब ऐसी सहमति आपराधिक षडयंत्र में नही आती इसका विवरण भी इसी धारा में परन्तु में बताया गया है:-
परन्तु:- किसी अपराध को करने की सहमति के अलावा अन्य कोई सहमति आपराधिक षड्यंत्र तब तक नही होगी, जब तक उस सहमति के चलते दो या अधिक लोगो द्वारा कोई कार्य नही किया जाय।
दोस्तो ये थी आपराधिक षड्यंत्र की विस्तृत परिभाषा अब बात करते है इसके दण्ड की आपराधिक षड्यंत्र का दण्ड भारतीय दण्ड संहिता की धारा 120(ख)/120(B) में बताया गया है।
धारा 120(ख)/ धारा 120(B):- 1 जो कोई मृत्यु, आजीवन कारावास, या दो वर्ष या उससे अधिक के कठिन कारावास दण्डनीय अपराध करने के आपराधिक षडयंत्र में शामिल होगा , ओर यदि भारतीय दण्ड संहिता 1860 में ऐसे दण्ड के लिए कोई स्पष्ठ उपबन्ध नही है, तो वह उसी प्रकार दण्डित किया जाएगा , जैसे उसने ऐसे अपराध का दुष्प्रेरण किया था।
2. जो कोई ऊपर बताए रूप से दण्डनीय अपराधों से भिन्न किसी अपराध का आपराधिक षड्यंत्र करेगा वह दोनों में से किसी भी कारावास से जिसकी अवधि 6 महीने से अधिक नही होगी या जुर्माने से या दोनों से दंडित किया जावेगा।
तो दोस्तो आज हमने विस्तार से आपराधिक षड्यंत्र के बारे में जाना अब हम अगली बार विधि विरुद्ध जमाव के बारे में ओर विधि विरुद्ध जमाव के दण्ड के बारे में समझेंगे।।।
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